आज फिर से, दवात
समर्पित: IndiBlogger.in
मैंने भर लाई है !
आज फिर से,काली
स्याही खरीद लाई है !
आज फिर से, नरगद
की कलम बनाई है !
आज फिर से, पुरानी
चेयर उठाई है !
आज फिर से, टेबल
आज फिर से, टेबल
की धुल उड़ाई है!
आज फिर से, लालटेन
खुद से जलाई है!
आज फिर से, टाइम-मशीन
बनाने का मन हुआ है!
आज फिर से, चहरे
पे उदासी छाई है!
आज फिर से, कविता
लिखने का मन हुआ है!
आज फिर से, तुम्हारी
याद आई है!
[Note: I got a poem in reply, which will be posted in few days!]
